Face book

अपनी गुड्डो को गोद में सिमटाए, गोल तकिए पर पीठ टिकाए, पेन्सिल को होंठ में दबाए हम क्रोसवर्ड की पहेली सुलझा रहे थे कि एकाएक  फोन घनघना उठा। रिसीवर  उठाते ही हमारी एक पंचायती परिचिता की भेदिया आवाज़ लहराई— “वाह भाबी जी, आजकल बड़ी  active हो रही है !”
                            हम एकदम झटका खा गए । गोद में गुड्डो न होती तो पलंग से नीचे जा गिरते । सत्यानास हो इन गूगल वालों का , लोगों के घर की location तो दिखाते ही  है अब घर के भीतर भी  झांकने लगे । जाने  क्या- क्या और हमारी कौन सी activity को देख लिया है इस gossip queen ने। 
                 डरते डरते  हम खिसयाए से मिमियाए— ” हम  तो हमेशा से ही  active रहने की कोशिश करते है, नहीं तो इस उमर में जोड़ जम ना जाएगें । पर आपको कहां से हमारे active होने का पता चला ??
“Face book से”
“ओह!!!” हमारी सांस में सांस आई।
हमारी  “ओह” को अनसुना करते हुए वो चहकीं
” आजकल किसको – किसको follow कर रही है और कौन- कौन आपको follow कर रहा है? कितने account खंगाल डाले ?”
” कैसी बात कर रही है आप!!! हम शत प्रतिशत devoted wife है, सदा अपने पति को ही follow किया है और हमारे पीछे कौन व कितने है ,इस पर कभी ध्यान नहीं दिया ।  लोगों के accounts खंगाले का काम मोदी जी कर रहे है हम नहीं ।  हमें क्या पड़ी है कि हम किसी का account खंगाले।”  हम ज़रा गुस्साए।
               ” हा-हा-हा , आप तो बड़ी ही मज़ाकिया है। पर यह बताइए आपने  अभी तक अपनी डी.  पी क्यों नहीं बदली ? कोई  फोटो भी नहीं डाली । मेरी मानिए भाई साहब की फोटो डाल दिजीए , ढेरों likes मिलेगें।”
                             मन हुया कैंची जैसी चलती इनकी ज़बान को कैंची से ही कतर दूं ,पर दूरी मज़बूरी थी।
                  झल्लाते हुए हमने उन्हें बताया कि यह सब करना हमने अभी सीखा नहीं है। दो पल के लिए उनकी बोलती में  ब्रेक लगा फिर अविश्वास से बोलीं—” क्या सच में अभी तक आप बिल्कुल socially inactive थी?”
                  अपनी गाड़ी को गल्त दिशा में दौड़ातै हुए हम बोले–   ” हमारी मेहमान नवाज़ी और दोस्तबाज़ी के बारे में तो  आप अच्छे से जानती ही है । इसके इलावा हम कई कल्बों और संस्थायों के कर्ता-धर्ता है। दान-पुण्य-सेवा के काम में भी सहयोग करते ही रहते है। रोज़ एक घन्टा बच्चों को फ्री टूयशन देते है। अब इससे  ज्यादा socially active क्या होंगें।”
                परिचिता ठहाका लगा कर बोलीं—” Omg! How old fashioned you are. You do not even  know the meaning of social activity.   ख़ैर आप दुख़ी न हो, आड़े वक्त में दोस्त ही काम आते है।  मैं आपको सब समझा दूगीं।   बहुत दिन से आपके हाथ का बना लज़ीज़ काश्मीरी खाना नहीं  खाया,  कल लंच पर मिलते है।”
          मन में आया कह दे कि  नेट पर सब मौजूद है काहे नहीं देख कर बना लेती।    परन्तू तहज़ीब ने जीभ थाम ली।  वह हमारी Self appointeded  गुरू थी और उन्हे गुरूदक्षिणा  देना हमारा  परम कर्तव्य था।

                            

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