हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा

हम भी उन्मुक्त जी की तरह भारत के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एक आम भारतीए है। अपने कस्बे की गलियों में हम सालों से चप्पल चटका रहे है, हर मेहमान के संग खरीदो-फरोख्त करवा रहेे है और सड़कें नपवा रहे है, शायद इस कारण हमारे कस्बे के दरो दिवार हमें अच्छी तरह से जानने पहचानने लगे है और हम खुद को कुछ खास यानि कि व्यक्ति विशेष मानने लगे है।

आखिर क्यों न मानें। हमारे मुंह खोलने से पहले ही साड़ी वाला बज़ाज हमें देखते ही हल्के फुल्के रंगों की साड़ियों से रिझाता है और जूतेचप्पल वाला लोहील की सैंडिल पहनाता है। बेकरी पर ब्राऊनब्रेड पकड़ाई जाती है व मिष्ठानभन्डार पर लाल लाल कुरकुरी जलेबी सिकवाई जाती है। चाट वाला गोलगप्पों में खट्टी चटनी के संग मीठी चटनी मिलाता है, सब्ज़ी वाला रोज़ सब्ज़ी के संग फ्री में मिर्चाधनिया सरकाता है और राशन वाला चाय, साबुन, पेस्ट पर निकली नईनई स्कीमें दोहरता है। शहर भर में हमारा चेहरा ही हमारा क्रेडितकार्ड है।

अपने शहर की इस ज़र्रानवाज़ी को शीश धरे हम चैन की बंसी बजा रहे थे, अपने कस्बे की तलैया में मज़े से टर्रटर्रा रहे थे, उछलकूद मचा रहे थे कि एक दिन उड़ती उड़ती खबर हम तक आ पहुँची कि अपना लुड़कतापुड़कता, दुबलापतला, पिद्दी सा रुपया पहलवान हो गया है औऱ डालर के खिलाफ कुछ बलवान् हो गया है। नतीजन इस समय विदेशयात्रा करना लाभप्रद है क्योंकि विदेश यात्रा सस्ती हो गई है।

सैल(SALE) और सस्ता शब्द स्त्रियों को सदैव ही सम्मोहित करता है। सो बेबस हुए हम भी उसके आकर्षण में बंधे रुपए की पहलवानी भुनाने ट्रेवलएजेंट के द्वारे जा पहुँचे। मामला फायदे का था, अत: हमने अपने और पति के संगसंग दोनों बच्चों का भी टिकट बनवा लिया। सोचा बहती गंगा में उनको भी डुबकी लगवा दें और फारेनरिर्टन का जामा पहना दें। इस जादुई जामे से बच्चों के व्यकित्व में आए निखार की सुखद कल्पना करते हुए हम खुशी खुशी थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर की पन्दरह दिवसिए यात्रा पर निकल गए।

पराए देश में पावं रखते ही आँखें वहां की भव्यता की चकाचौंध से चुंधिया गई। परन्तु एक पराएपन का एहसास हर समय मन को मथने लगा। पराए लोग, पराई भाषा, पराया खानपान, पराया रहनसहन। चारों और व्याप्त इस पराएपन के शुष्क वातावरण में मुझे अपने शहर का अपनापन रह हर कर याद आने लगा और पल पल भारतीए होने का एहसास गहराने लगा। पहली बार यह महसूस हुया किसी भी साधारण से आम व्यक्ति को खास उसके जाननेपहचानने वाले आसपास के लोग बनाते है। यही लोग चाहे वो परिवार के हो, पड़ोस के हो, किसी नगर के हो या फिर देश के, व्यक्ति विशेष को एक पहचान देते है और बताते है कि वह फलां परिवार, फलां समाज ,फलां शहर, प्रदेश या देश का सदस्य है। यही पहचान अन्जान परिस्थितियों में उस व्यक्ति का संबल बनती है।

हमारी पहचान गली मुहल्ले में हमारे परिवार से, शहर में हमारे मुहल्ले से, प्रदेश में हमारे शहर से, देश में प्रांतप्रदेश से और विदेश में केवल हमारे देश से होती है। अपने देश में चाहे हम खुद को हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी या दक्षिणी भारतीय कहते है परन्तु देश के बाहर विदेशी धरती पर सब भेद भाव अपने आप मिट जाते है और हम सब भारतीय पुकारे जाते है। इसी भारतीयता के कारण दो अपरिचित, साधारण से आम भारत वासी अन्जाने देश में एक दूसरे के लिए, आत्मीय और कुछ खास हो जाते है क्योंकि दोनों की पहचान एक है, दोनों का समूह एक है, दोनों का देश एक है।

थाईलैंड में एक प्रोग्राम के दौरान इसी पहचान, इसी देशप्रियता का नज़ारा देखने को मिला। प्रोग्राम शुरू होने में थोड़ी देर थी इसलिए विभिन्न देशों का संगीत बारी बारी से बज रहा था। जिस देश का गीत बजता था उसके निवासी अपने देश के गीत पर ताली बजा कर अपने देशप्रेम का इज़हार करते थे। जैसे ही एक भारतीए गीत बजाया गया, पंडाल में मौजूद हर भारतीय ने न केवल ताली बजा कर ताल दी बल्कि सभी खड़े हो गए और सबने मिल कर गाना और नाचना शुरू कर दिया। शायद य़ह वहां मौजूद ढेर सारे भारतीयों का जोश और उत्साह था जिसे देख कर अगला गीत लगाया गयाये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का ,मस्तानों का। इस गीत पर तो खूब जम कर नाच हुया। भारतीए खड़े होकर झूम रहे थे और पंडाल में बैठे अन्य दर्शक ताली बजा कर ताल दे रहे थे। उस समय मुझे लगा कि उस विदेशी धरती पर हर एक आम भारतीए विशेष और महत्वपूर्ण हो गया है और वह विशेषता है हमारी भारतीयता।

Advertisements

12 responses to “हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा

  1. आपना देश हो या अपना मुहल्ला जब दूर हो तो ही अहमीयत पता चलती है

  2. सच कहा आपने-हमारी भारतीयता!! अच्छा लगा पढ़ना. अब जरा यात्रा का विस्तृत वृतांत सुनाया जाये. 🙂

  3. अच्छा लगा पढ़कर । और हाँ यात्रा की कुछ फोटो भी तो लगाइये।

  4. “हमारी पहचान गली मुहल्ले में हमारे परिवार से, शहर में हमारे मुहल्ले से, प्रदेश में हमारे शहर से, देश में प्रांत-प्रदेश से और विदेश में केवल हमारे देश से होती है।”

    सही कहा आपने। जब मंगल ग्रह पर जायेंगे तो परिचय पृथ्वी वासी के रूप में दिया जायेगा 🙂
    कल्पना चावला का एक कथन है “मैं आकाशगंगा की नागरिक हूँ”…ये तब के लिये जब सुदूर ब्रह्मांड में कहीं यात्रा पर निकला जाये।

  5. सही कहा नीतिन जी। टीक वैसे ही जैसे यूरोप में हम एशियन कहलाते है।

  6. सच कहा आपने यहाँ हम दक्षिण में उतर भारतीय के रूप में जाने जाते हैं।
    तस्वीरें भी बतायी जायें। 🙂

  7. चिट्ठियों से तो आप न तो किसी छोटे कसबे की लगती हैं, न ही आम भारतीय – आप तो कोई खास हैं। कम से कम हिन्दी चिट्टा जगत में तो अवश्य।
    कुछ चित्र दिखाइये तो मजा आये।

  8. वाह क्या लिखा है आप् ने, bahut sundar likha aapne kasam se, mujhe hindi mein likha bahut pasand hai lekin abhi seekh nahi paya hu computer par hindi likhna jis din seekh jauga jarur hindi mein apne blog likhuga….. aur aapki yeh baat ‘ हमारी पहचान गली मुहल्ले में हमारे परिवार से, शहर में हमारे मुहल्ले से, प्रदेश में हमारे शहर से, देश में प्रांत-प्रदेश से और विदेश में केवल हमारे देश से होती है। अपने देश में चाहे हम खुद को हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी या दक्षिणी भारतीय कहते है परन्तु देश के बाहर विदेशी धरती पर सब भेद भाव अपने आप मिट जाते है और हम सब भारतीय पुकारे जाते है।’ Dil ko chu gayi kamal likha aapne ratna ji. bahut acha bahut hi acha

  9. बहुत दिनों बाद आपकी रसोई के पकवानों के रसास्वादन का मौका मिला. हम तो भूखे ही रह गए थे. पाठकों को ऐसा भूखा न रखा करिए. 🙂

  10. बहुत सुन्दर यात्रा वृत्तान्त. वैसे ये पढ़कर हमें कुछ पंक्तियाँ याद आ गयीं…
    अरुण यह मधुमय देश हमारा…
    जहाँ पहुच अनजान लहर को मिलता एक किनारा…
    अरुण यह मधुमय देश हमारा…
    एक और कविता की कुछ पंक्तियाँ भी आपके साथ बांटना चाहेंगे…
    यूनान, मिस्र, रोमा मिट गए सही जहाँ से,
    बाकि रहा न कुछ भी….???……
    है बात ही कुछ ऐसी के हस्ती मिटती नहीं हमारी,
    सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहाँ हमारा…

  11. वाह क्या लिखा है आप् ने, बहुत सुन्दर यात्रा वृत्तान्त

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s