और नहीं बस और नहीं

विपत्ति एंव दुश्वारी, तकलीफ और बिमारी कभी अकेले नहीं चलती। चले भी क्यूँ। आखिर उनकी जानमाल का सवाल है। नईनई दवायों, वित्तिय सुविधायों के मारे उनके स्टेटस का यूहीं बुरा हाल है। इसीलिए हमेशा ये अपनी निजी कमांडोफोर्स के साथ, लगा कर घात चुपके से धर दबोचती हैं।

जनवरी मास में, कुम्भ- प्रवास में आए मेहमानों की खातिरदारी की खबर जाने कैसे उन तक पहुंच गई कि दल बल के सगं ये सब हमारे घर में बिना बुलाए मेहमानों की तरह घुस आईं। पहला हमला हमारे छोटे बेटे पर किया । विश्वफुटबाल मैच के बाद से उसकी बैकहेम बनने की धुन को घुन उस समय लग गया जब वो बाँह तुड़वा कर, पलस्तर बंधवा कर हमारे आँचल के तम्बू नुमा पवेलियन में वापिस लौट आया। उसकी तिमारदारी से फ़ारिग नहीं हुए थे कि बड़े बेटे के पेट में दर्द शुरू हो गया। मामले की छानबीन हुई और पता चला कि होस्टल के खाने में मौजूद कंकड़ पत्थर उनके गुर्दे (kidney) की छननी तक जा पहुंचे है। मरते क्या न करते हम उन्हे बिनवाने में जुट गए।

काम निपटा कर ज़रा कमर सीधी की थी कि ससुर साहिब ने असल से सूद अधिक प्यारा होता हैकी सत्यता का प्रमाण दे दिया। बच्चों की टहलदारी में टेड़ी हुई हमारी कमर की कदर किए बिना, पोतों की चिन्ता में घुल घुल कर खाट पकड़ ली। मशीन पुरानी थी सो ओवरआयलिंग करके दुरस्त करते करते काफ़ी समय लगा। अब तक वार दर वार झेल कर हम इतना थक चुके थे कि सोचा क्यों न कुछ दिन केलिए अंडरग्राउंड हो जाएं। मैदान खाली देख कर तकलीफ़दुश्वारी खुद ही घर से दफा हो जाएगी।

हफ्ते भर घूमघाम कर वापिस आए तो माहौल खुशगवार लगा। आप लोगों से मुलाकात भी की। पर हमारा इस तरह से दगा देना मैडम बिमारी को पसंद न आया। मौका पाते ही उसने हमारे शरीर के कोनेकुतरे में छुपे चिकनपौक्स (Chicken-pox) के जीवाणुयों को भड़का दिया और उन्होंने हरपीस( Herpes) का लबादा औढ़ हम पर हल्ला बोल दिया। दर्द के ऐसे भयानक झटके दिए कि हमें नानी याद आ गई। पिछले बीस दिन से हम वायरस नाशक और दर्द निवारक असले से लैस होकर, ज़बरदस्त गोला बारी कर रहे है पर अभी तक इन दहशतगर्दों पर पूरी तरह से विजय प्राप्त करने में सफल नहीं हुए है।

पतिदेव ऐसी हालत में हमें अकेला छोड़ देते तो बेवफा कहलाते सो इस बीच उन्होंने भी बराबर के बिस्तर पर डेरा जमा, दुख सुख में साथ निभाने का अपना वायदा पूरा कर दिया है।

घर के सभी सदस्य बारी बारी बिमारी की तिमारदारी में अपना य़ोगदान दे चुके है इसलिए उम्मीद करती हुँ कि अब कष्टचक्र पूरा हो गया होगा और आगे का सफ़र शांति पूर्ण रहेगा। पिछली पोस्ट में पीड़ापुराण सुनाने का मन न हुया क्योकि ढेरों गम है इस ज़माने में, क्यों अपना कष्ट किसी को बताएं, छोटी सी ज़िन्दगी है, बेहतर है, हिल मिल कर बैठें व सिर्फ खुशियाँ लुटाएं। परन्तु टिप्पणीटानिक के कई चम्मच डकार कर जब हम बिना धन्यवाद कहे बीस दिन के लिए तड़ीपार हो गए तो सोचा वाज़िब वजह से आपको वाकिफ़ करवाना हमारा फर्ज बनता है।

शेष स्वास्थ्य सुधार के आधार पर—-

 

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13 responses to “और नहीं बस और नहीं

  1. तभी मैं कहूँ कि रसोई पे ताला कैसे लगा हुआ है इतने दिन से… हमारी Get Well Soon कामना तो है ही आपके साथ…आराम से आइयेगा..तब तक हम होटलों पर काम चलाते हैं 🙂

  2. रसोई का ताला खुलने का इन्‍तजार रहेगा। भूख बहुत तेज लगा है। 🙂

    जल्‍दी स्‍वथ्‍य लाभ करें।

  3. आपको सपरिवार शीघ्र स्वास्थय लाभ की अनेकों शुभकामनायें.

    आराम कर लें-इंतजार करेंगे आपकी खुशनुमा वापसी का. 🙂

  4. आप जल्दी से स्वस्थ हो जाए ,अभी आपका लिखा पढ़ा बहुत अच्छा लगा .. परन्तु टिप्पणी-टानिक के कई चम्मच डकार कर जब हम बिना धन्यवाद कहे बीस दिन के लिए तड़ी-पार हो गए तो सोचा वाज़िब वजह से आपको वाकिफ़ करवाना हमारा फर्ज बनता है।[:)]

  5. इतनी तकलीफ को भी आपने क्या मजेदार शब्दों में बाँध दिया।

  6. शीघ्र ही आप पूर्णतः स्वस्थ हो ये कामना है और इसे देखें ये आपके लिए निश्चय ही एक pleasent surprise होगा 🙂

    http://nukkad1.blogspot.com/2007/03/blog-post.html

  7. रत्ना जी, रसोई की चिंता छोड़ें, पहले स्वास्थ्य लाभ करें, तत्पश्चात हम व्यंजनों की अपेक्षा करेंगे।

    आपका यह चिट्ठा बहुत प्रेरणास्पद है, विपत्तियों का सामना करना अपने आप में कठिन होता है। हम लोग तो पूर्व में झेली हुई विपत्तियों को भी दर्द के साथ याद करते हैं, फिर हास्य के रूप में स्वयं पर आयी विपदाओं को संजोना – यह निश्चय ही आपकी खुशमिजाजी व सहनशीलता का परिचायक है।
    सुख और दु:ख को समान भाव से देखना एक बड़ी उपलब्धि है।

    उम्मीद करती हुँ कि अब कष्ट-चक्र पूरा हो गया होगा
    चक्रारवत् परिवर्तन्ते दु:खानि च, सुखानि च।
    (सुख और दु:ख तो चक्र की तीलियों की तरह परिवर्तित होते रहते हैं)

  8. पहली बार किसी की तकलीफ के बारे में पढ़ पढ़ कर हंसता रहा, आशा है अब रसोई में खाना पकता रहेगा। रसोई के सारे बर्तनों के स्वास्थ्य लाभ के लिये शुभकामनायें 😉

  9. आप शीघ्र सारी विपत्तियों से छुटकारा पायें। आपका इंतजार है!

  10. स्वास्थ्य लाभ लेकर शीघ्र रसोई में लौटें।

  11. स्वास्थय लाभ के लिए शुभकामनाएं, जल्द स्वस्थ होकर लौटें।

  12. आप जल्दी ही स्वस्थ हों …..ऎसी कामना है

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