हालत नौनिहालों की

परिचर्चा पर एक सदस्या ने हमें फिल्मी कव्वाली की धुन पर, बच्चों के जीवन से सम्बन्धित एक गीत लिखने को कहा था। नीचे लिखा गीत उसी फरमाइश का परिणाम है।

आज इस सादी डिश से काम चला लें । वादा है, अगली बार हम ऊँची और मशहूर दुकानों पर उम्दा ढंग से बने, बढिया व्यंजन लेकर उपस्थित होगें।

वो क्या है कि दो रोज़ पहले ही कुछ मशहूर शायरों और कवियों से मुलाकात हुई है। ज़ाहिर है मुलाकात हुई है तो बात भी हुई होगीं।

अब बात हो और दूर तलक न जाए यह तो सम्भव नहीं है।

 

गीत

 

( गीत और धुनये देश है वीर जवानों का,

अलबेलों का मस्तानों का–)

सुनो हालत हम मतवालों की

इस देश के नौनिहालों की

हम दिल का हाल, होएहोए

हम दिल का हाल सुनाते है

तुम्हें दर्द अपना दिखलाते है

——-—————–

हो————————-

हम ज़रा सा बस तुतलाए थे

माँ ने ढेरों सबक रटाए थे

यहाँ मुँह खोलना, होएहोए

यहाँ बोलना तक जंजाल हुया

हाय बचपन का बुरा हाल हुया

———————

हो———————–

अभी चलना सीख न पाए थे

पापा स्कूल ले आए थे

यहाँ कदम बढ़ाना, होएहोए

यहाँ चलना तक भूचाल हुआ

हाय बचपन का बुरा हाल हुआ

———————

हो———————–

जब भोऱ के सपने आते है

माँबाप झिंझोड़ जगाते है

यहाँ सपनसलौना,होएहोए

यहाँ सपनों का आकाल हुआ

हाय बचपन का बुरा हाल हुआ

———————

हो———————–

जब क्लास में भूख सताती है

तो टीचर पाठ पढ़ाती है

यहाँ खानापीना, होएहोए

यहाँ खाना तक मुहाल हुया

हाय बचपन का बुरा हाल हुआ

———————

हो———————–

संध्या को खेल न पाते है

हम होमवर्क निपटाते है

यहाँ खेलनाकूदना, होएहोए

यहाँ खेलना एक ख्याल हुया

हाय बचपन का बुरा हाल हुआ

———————

हो———————–

जब से दुनिया में आए है

हम खुल कर न मुस्काए है

यहाँ हंसनाहंसाना,होएहोए

यहाँ हंसना तक बे -ताल हुया

हाय बचपन का बुरा हाल हुया

यहाँ बोलना तक जंजाल हुया

हाय बचपन का क्या हाल हुया

यहाँ चलना तक भूचाल हुआ

हाय बचपन का क्या हाल हुआ

यहाँ सपनों का आकाल हुआ

हाय बचपन का क्या हाल हुआ

यहाँ खाना तक मुहाल हुया

हाय बचपन का क्या हाल हुआ

यहाँ खेलना एक ख्याल हुया

हाय बचपन का क्या हाल हुआ

यहाँ हंसना तक बेताल हुया

हाय बचपन का क्या हाल हुया

हाय बचपन का क्या हाल हुया

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8 responses to “हालत नौनिहालों की

  1. वाह रत्ना जी
    वाह वाह वाह….
    आपकी कविताएँ तो मुझे हमेशा से पसंद आती थीं । पर दूसरे की दी हुई situation पर आपके द्वारा किया गया ये प्रयास अनूठा और निराला है ।

  2. वाह जी वाह। कविताएँ वगैरह तो मैं पढ़ता नहीं क्योंकि वे मेरे सिर के ऊपर से निकल जाती हैं पर यह गीत तो वाकई बढ़िया है, मज़ा आ गया पढ़ कर। अब इसको कोई मधुर आवाज़ में सुना दे तो तबियत प्रसन्न हो जाए। 🙂

  3. आपका यह पौष्टिक व्यंजन हमने फ्रिज में रख दिया हैं, समय पर सदउपयोग करने की इच्छा हैं, अनुमति प्रदान करें.

  4. अब ज़रूरत है कोई इसे अच्छी आवाज़ मे गा कर सुनाए – बहुत ही खूबसूरत गीत है – वाह रत्ना जी वाह

  5. बहुत सुन्दर रत्नादी,
    कटु सत्य बयान किया है। यह दृश्य में रोज अपने घर में देखता हूँ जब बच्चे स्कूल से आते हैं। पहले ट्यूशन फ़िर घर आकर स्कूल का होमवर्क, फ़िर ट्यूशन का होमवर्क…. बाप रे; कई बार तो उनींदे से होमवर्क करते दिखते हैं। तब बड़ा तरस आता है।
    बच्चों के गीत किसे अच्छे नहीं लगते? अच्छा होता जब इसे आप अपनी आवाज में रिकार्ड कर सुनाती।

  6. रत्नाजी आपकी कविताएं वाकई मन को भाती हैं। बस ऐसे ही लिखती रहिए।

  7. ये कविता आपकी आवाज में सुने तब असली मजा आयेगा.

  8. रत्ना जी भई वाह। आपका किन शब्दों में धन्यवाद दूँ। आपने तो मेरा दिल जीत लिया। मजा आ गया। बहुत बहुत धन्यवाद।

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