आइडिए की खोज में

आज जब हमने अपनी कलम से कसरत करवाने की कोशिश की तो थोड़ी थकी सी, पस्त और पकी सी ठुकी व ठगी सी कुछ कतरा कर बोलीकिस रूट पर दौड़ लगाऊं, क्योंकि मच्छर से मानव तक, गाली से गला दबाने तक, प्यार से तकरार तक,साकार से निराकार तक, झक्कास से बकवास तक,च्युन्गम से च्यवनप्राश तकबिखरे विषयों की इतनी सड़कें, गलियां और पगडंडियां है कि बिना रूट जाने निकली तो इस भूलभूलैयां से हार कर होश खो बैठूंगी। तुम्हारे विचार में तो——

विषयों की बरसात है,

चहूँ ओर मची है लूट

मैं भी इकदो लपक लूँ,

कहीं पीछे जाऊँ न छूट

पीछे जाऊँगी छूट

तो होगी दिक्कत भारी

बुद्धिजीवी समाज में

कटेगी नाक तुम्हारी।।

हमने कलम पर करूणा बरसाई, उसे एक दिन की छुट्टी अता फरमाई,प्यार से पुचकारा,दवात में आराम करने को उतारा और फिर निकल पड़े विषय के रूट की पड़ताल करने। अपनी पतली सुतवां नाक को तो हम किसी सूरत कटवा नहीं सकते थे, उलटे उसके सदके में हम कुछ भी काट डालने को तैयार थे इसलिए फ्रिज में से सेब निकाला, प्लेट पर डाला और तेज़ छुरी से काट डाला। आप पूछेंगे आखिर सेब का नाक से क्या सम्बन्ध?? तो साहब, पिद्दी सी नाक क्या हमारा पूरा वजूद ही सेब की महिमा पर टिका है। बाबा आदम ने जैसे ही सेब खाया उनके दिमाग में नित नए विचार आने लगे, खुराफातों के खरबों कीड़े कुलबुलाने लगे और भगवन् ने डर कर मय सेब के पेड़ के बाबा जी को एकाकी धरती की रेलमपेल में ठेल दिया ताकि उनके पास पल पल जन्म लेते Ideas के बारे में सोचने का समय ही न बचे। जब अपने बारे में सोचने की फुरसत नहीं होगी तो मेरे अस्तित्व को चुनौती क्या दे पाएगा। यानि न होगा बाँस और न बजेगी बाँसुरी। पर जब बाबादादी उम्मीद पर खरे न उतरेे तो उनके वशंज कौन दूध के धुले थेे। जा बैठे मिस्टर न्यूटन सेब के पेड़ तले और फिर जो सेब ने कमाल दिखलाया वो तो जगत् प्रसिद्ध है। अब हमारे बगीचे में सेब का पेड़ तो था नहीं इसीलिए एक हाथ में सेब की प्लेट पकड़े और दूसरे में चटाई दबाए हम अपने लान के प्रेरणा दायक वातावरण में आ पहुँचे। हरीहरी नरम घास पर चटाई फैलाई, सेब का टुकड़ा मुँह में डाला,आँखें बंद की और दिमाग को धांसू विषय पर झक्कास आइडिया लाने को कह उसके इन्तज़ार में पसर गए।

दिमाग बेचारा जो विषयों के कुम्भमेले में दाखिल हुया तो घन्टों भटकता रहा। काफी देर बाद जब वो सबसे जुदा,एक नन्हा सा, रोतासुबकता व पाँव पटकता आइडिया गोद में उठाए लौटा ही था कि पतिदेव की आवाज़ कान में पड़ी— “ दिमाग गुम गया है क्या?? ” साहब पहली माला पर फाइलों के गांव में और हम बाहर हरी घास पर तारों की छांव में; इतनी दूरी और कितनी दिवारों के पार भी हमारी मन:स्थिती पहचान ली ! क्या बात है! इसे कहते है-PERFECT UNDERSTANDING !!! हम आँखों से आरती उतार, मुस्कान का हार पहनाने ही वाले थे कि पतिदेव के गुस्से की तपिश महसूस हुई और कुछ चिन्गारियां झोली में आ गिरी“सामने वाले सिंह साहब फोन पर दहाड़ रहे थे कि अमां यार तुमने ऐसा क्या कर डाला कि बेचारी हमारी भाबी जी ज़मीन पर पसर फलाहार कर तुम्हारे पाप का प्रयाश्चित कर रहीं है। किस्मत वाले हो जो ऐसी पत्नी पाए। और दूसरे लाइन पर बगल वाली शर्माइन शर्मा कर कह रही है कि भाई साहब, आपके रत्न की चमक कुछ मन्दी पड़ी तो आपने अंगूठी से निकाल बाहर लान में टपका दिया। दूसरा बढ़िया रत्न लाने के मूड में है क्या !”

हमारे मन में आया कि सनके हुए सिंह का सिर फोड़ दूँ और सोशलाइट शर्माइन को शूट कर दूँ पर निंदक नियारे राखिए,आंगन कुटि छवाए, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाएके दूरगामी लाभ को ध्यान में रख, पति के मुँह में बचा सेब का टुकड़ा डाला, उनकी बाँह में बाँह फंसाई, खाली हाथ में प्लेट थमाई और दोनों दिशायों में गरदन घुमा कर, तिरछी नज़रों से बददुआ के विष भुजे तीर दाग, हम घर के भीतर चल दिए। पर इस उठापटक में हमारा नन्हा सा, सबसे जुदा आइडिया सहम कर जाने कहाँ दुबक गया था। आप को मिले तो कृपया हमें हमारे पते पर खबर अवश्य कर दें। अभी तो हमें केवल यह ख्याल आ रहा है

कहीं पर पली थीं,कहीं को चली थीं

दो ज़िन्दगानी बेसाख्ता मिली थीं

नज़रो ने दिल की थी हसरत पढ़ी

जन्मों की कड़ियां थी फिर से जुड़ी

कुछ मैंने कहा कुछ उसने सुना

अन्जाने ही एक अफ़साना बना

अफसाना हमारा ज़िन्दगी भी हमारी

पर जाने क्यों है औरों को बेकरारी

हर हालोहुज्जत की उनको खबर

गोया रखते हो पल पल वो हम पर नज़र

वो हमारे रिश्ते पर है कसमसाते

इसे रस्मेंशौक औजनून है बताते

अरज़ है रहम कर ऐ अल्लाताला

दे हमारे चाहने वालों को भी चाहने वाला।।

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6 responses to “आइडिए की खोज में

  1. बहुत बढ़िया दिमाग को क्या छलांगे लगवाते हो भाभी जी। कहीं इन छलांगो को ओलम्पिक वालों ने देख लिया तो एक नई गेम ले आएंगे वे भी। मस्त लिखते रहो और सोश्लाइट शर्मा का पता बतावें शायद मुफ्त का खाना खाने को मिल जाए।

  2. जब आइडिये की खोज इतनी धांसू है तो आइडिया मिल जाने पर क्या होगा! आइडिये वाली पोस्ट का इंतज़ार है।

  3. शुभकामनाऎं कि आपको आईडिया जल्दी मिले और सुंदर सी पोस्ट पढने मिले.

  4. पंकज भाई, धन्यवाद। मुफ्त के खाना बेहद मंहगा पड़ेगा।

    समीर जी, अनूप जी,- आज से नारद पर हर पोस्ट बहुत आँख गड़ा कर पढ़ें जो BEST लगे, समझ लें हमारा ही आईडिया है

  5. अमां यार, ये हर जगह बवाली लोग शर्मा ही क्यों होते हैं।
    सारा भारत शर्मा और वर्मा से परेशान है, हर तीसरा उनमें से एक है।

  6. मज़ा आ गया पढ़ के। ‘आइडिये’ का हुलिया थोड़ी तफ़सील से बताइयेगा। तभी तो भीड़ में पहचानेंगे उसे। अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा।

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