स्वयम् हित में जारी सूचना

काफी समय से अपनी खुराफातों और एकता कपूर की करमातों के चलते हमारा टी.वी पर सीरियलज़ देखना लगभग बन्द सा हो गया है। पिक्चर देखने जाते है तो कुछ साहब की सजावट, कुछ सड़कों की बनावट और कुछ ट्रेफिक की रुकावट के कारण हमेशा सूरदास का रोल निभाते हुए गिरते- पड़ते,दो चार के पैर का कचूमर बनाते हुए जब तक अपनी सीट पर विराजते है ,हाल में फिल्म का पहला गीत गूंजने लगता है। शायद इसी वजह से हम बिल्कुल भूल गए कि हर किस्से -कहानी के प्रसारण से पहले एक सूचना या चेतावनी परोसी जाती है—–

” इस कथा के सब पात्र, स्थान एवं परिसस्थितियां काल्पनिक है। वास्तविक जीवन से इनका कुछ भी लेना देना नहीं है। कोई भी समानता केवल संयोग मात्र है।”वगैहरा-वगैहरा।

यह जानकारी याददाश्त की कब्र में काफी समय से दफन थी अत: ज़रा क्षत- विक्षत रूप में निकली है पर इसकी D.N.A रिपोर्ट इसकी मूलभूत सरंचना की जो रूपरेखा प्रगट करती है उससे यह आशय निकलता है कि कथाकार की कल्पना का विमान यदि किसी के सम्मान की गगनचुम्बी इमारत पर दो चार कटाक्षों के बम टपका जाए तो यह केवल संयोग मात्र है तथा इसके लिए उसे दोषी नहीं ठहराना सर्वथा अनुचित है।

विमान रखने की तो हमारी औकात है नहीं। हाँ, कल्पना का स्टीकर साइड में चिपकाए, एक टूटी फूटी गाड़ी ज़रूर है जिसे धकिया कर दौड़ाते रहते है। दुर्भाग्य से जब उसे ब्लागस्पाट-वर्डप्रेस रूट पर फुल-स्पीड में भगा रहे थे तो जाने कैसे कन्ट्रोल से बाहर हो, कच्ची पगडंडी पर उतर, खुले में सो रही दो-एक कोमल भावनाओं को कुचल गई। लम्बा सफर था, शायद थकावट से हमारी आँख झपक गई होगी। अब हम सलमान समान होते तो अपनी सितारे जड़ी चमक से चौंधिया कर, दाउद को फुनवा घुमा कर, काली माया की बरसात में ज़मीरों को डुबाकर या किसी विश्व सुन्दरी के प्रेम मे पगला, दो बोतल चढ़ा देवदास सी सहानुभूति हथिया कर, मामला रफा-दफा करने की कोशिश करते। परन्तु पिछले जन्म के यह कर्म नहीं थे कि हम ऐसा सामर्थ्यशाली सौभाग्य लेकर दुनिया को ठेंगे पर रखते। इसलिए हमारी भलाई बस इसी में है कि स्वयम् हित में यह घोषणा जारी कर दें—–

” ब्लागस्पाट और वर्डप्रेस शब्दो का प्रयोग हमने केवल प्रतीकात्मक प्रयोजन से किया है। दोनों में से किसी को भी बेहतर या बद्तर प्रमाणित करने का हमारा प्रयास कदापि नहीं है”

इतना ही नहीं हम अपने की-बोर्ड पर हाथ धर कसम खाते है कि जो कह रहे है,सच कह रहे है और सच के इलावा कुछ नहीं कह रहे है। हमारे लिए तो यह दोनों ही भारत की सड़कों के समान है जिन पर हमारी जैसी छोटी गाड़ी कभी तो फर्राटे से फिसलती है और कभी गड्ढों पर कूदती- फाँदती अज्ञान के कीचड़ में जा फंसती है जहां से खींच कर बाहर निकालने के लिए, हमें किसी बड़े वाहन की मदद का प्रतीक्षा करनी पड़ती है। वर्डप्रेस हमारी कर्मभूमि है अत: ‘जल में रहकर मगर से बैर ‘ जैसी धमकी को धता बता कर, जिस डाल पर बैठे है उसी को काटना शुरू कर दें इतने मूर्ख हम कतई नहीं है और ब्लागस्पाट हमारा जन्मस्थल है और जन्मभूमि से नाता तोड़ लें ऐसी एहसान-फरामोशी तो हम सपने में भी नहीं सोच सकते। कहते है- पहला प्यार-पहली दुत्कार, पहला मीत-पहली जीत, पहली रात-पहली मुलाकात, पहली कार-पहली मार, पहली बीवी-पहला टी.वी, पहली जुदाई-पहली धुनाई– यानि कि हर पहली चीज़ की याद हृदय के वातानुकूलित चैम्बर में बड़ी सहेज कर रखी रहती है। फिर हम अपना पहला-पहला मयावी घर कैसे भूला सकते है। हम तो आज भी रोज़ दिन में दस चक्कर वहाँ के काट statcounter का मीटर आगे सरका आते है। आखरी विज़िट में 2056 था। सोच रहे है सज्जा बदल ब्लागस्पाट वाले इस घर से अँग्रेज़ी डिशेज़ परोसनी शुरू कर दें। किसी से कहिएगा मत, परसों से रैपिडैक्स इगंलिश कोर्स की किताब मांग अँग्रेज़ी सुधारने में जुटे है!!!!!

Advertisements

7 responses to “स्वयम् हित में जारी सूचना

  1. “पिक्चर देखने जाते है तो कुछ साहब की सजावट, कुछ सड़कों की बनावट और कुछ ट्रेफिक की रुकावट के कारण ”
    “कहते है- पहला प्यार-पहली दुत्कार, पहला मीत-पहली जीत, पहली रात-पहली मुलाकात, पहली कार-पहली मार, पहली बीवी-पहला टी.वी, पहली जुदाई-पहली धुनाई– यानि कि हर पहली चीज़ की याद हृदय के वातानुकूलित चैम्बर में बड़ी सहेज कर रखी रहती है।”
    बहुत खूब, कई बार पढा।
    अब तो लगता है आपको गुरू बना डालूं।

  2. आपका अंदाजे-बयाँ मन को भा गया। लेकिन अब विषय को बदल डालिए, रत्ना दी और नए-नए व्यंजनों का स्वाद चखाइए।

  3. रत्ना दी,
    सही कहा आपने, पहला प्यार-पहली दुत्कार, पहला मीत-पहली जीत, पहली रात-पहली मुलाकात, पहली कार-पहली मार, पहली बीवी-पहला टी.वी, पहली जुदाई-पहली धुनाई– यानि कि हर पहली चीज़ की याद हृदय के वातानुकूलित चैम्बर में बड़ी सहेज कर रखी रहती है।

    सृजन शिल्पी जी
    यह बहुत गलत बात है, रत्ना दी शब्द पर हमारा Copyright है, हम सब का नामकरण करें और कोई हमें धन्यवाद भी ना दे? 🙂

  4. आप सब का बहुत-२ धन्यवाद।

    छाया जी, गुरू शब्द पढ़ते ही जाने क्यों गुरू-घंटाल का रूप साकार हो उठा

    सृजन-शिल्पी जी,सच कहा आपने,हम भी इस विषय पर लिखते-लिखते बोर हो गए है।

    सागर जी ,९ तारिख को राखी है। सबसे पहले आप ही लाइन में हैं।

  5. लेख बढ़िया लगा। आगे का इंतजार है।

  6. हिट काउन्टर बढाने का अच्छा नुस्खा है :

    सुबह सुबह नहा धोकर, अगरबत्ती जलाकर, कम्प्यूटर देव के सामने बैठकर, इन्टरनैट देव का स्मरण करें।मन ही मन ब्लॉगिग महिमा का गुणगान करें।नारद पर जाइए, जो पहले ब्लॉग पोस्ट से शुरु करके आखिरी ब्लॉग तक, सभी पोस्ट पर क्लिक करिए।लाइन से हर ब्लॉग पर विजिट करिए। अपनी टिप्पणी रूपी शुभकामनाएं छोड़ आइए।यदि उस पर भी लोग ना आएं तो हमारे रामबाण नुस्खे को आजमाते हुए ब्लॉग लिखें। फिर देखिए।

  7. रत्ना जी बहुत अच्छा लिखा है । पहले की कुछ पोस्ट नहीं पढ़ पाया हूँ। कारण कि इधर कम्पयूटर ने बहुत दिनों से धोखा दे रखा है।
    किसी तरह आफिस से बात-व्यवहार चला रहे हैं ।
    वैसे ब्लॉगस्पाट वालों का साथ छोड़कर आपने अच्छा नही किया । आखिर मुसीबत में ही दोस्ती की परीक्षा होती है । 🙂 :p

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s