Life

“Life Is A Question,
Nobody Can Answer It.
Death Is An Answer,
Nobody Can Question It.”
                                              These lines posted  by Pankaj Agarwal ji triggered the following  musings—

                       जिन्दगी क्या है???
                       
                  भगवान की दुआ है
                      जुआरी का जुआ है
                          जन्मों का धुआँ है
                                  या कर्मों का कुआँ है??

                    यह पापों की सज़ा है
                        पुण्यों का मज़ा है
                            इन्सान की कज़ा है
                                          या खुदा की रज़ा है ??

                      यह एक हंसी ख्वाब है ?
                             अधखिला गुलाब है ?
                                   बरसों बंद शराब है ?
                               या सिर्फ सालों का हिसाब है।।

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Face book

अपनी गुड्डो को गोद में सिमटाए, गोल तकिए पर पीठ टिकाए, पेन्सिल को होंठ में दबाए हम क्रोसवर्ड की पहेली सुलझा रहे थे कि एकाएक  फोन घनघना उठा। रिसीवर  उठाते ही हमारी एक पंचायती परिचिता की भेदिया आवाज़ लहराई— “वाह भाबी जी, आजकल बड़ी  active हो रही है !”
                            हम एकदम झटका खा गए । गोद में गुड्डो न होती तो पलंग से नीचे जा गिरते । सत्यानास हो इन गूगल वालों का , लोगों के घर की location तो दिखाते ही  है अब घर के भीतर भी  झांकने लगे । जाने  क्या- क्या और हमारी कौन सी activity को देख लिया है इस gossip queen ने। 
                 डरते डरते  हम खिसयाए से मिमियाए— ” हम  तो हमेशा से ही  active रहने की कोशिश करते है, नहीं तो इस उमर में जोड़ जम ना जाएगें । पर आपको कहां से हमारे active होने का पता चला ??
“Face book से”
“ओह!!!” हमारी सांस में सांस आई।
हमारी  “ओह” को अनसुना करते हुए वो चहकीं
” आजकल किसको – किसको follow कर रही है और कौन- कौन आपको follow कर रहा है? कितने account खंगाल डाले ?”
” कैसी बात कर रही है आप!!! हम शत प्रतिशत devoted wife है, सदा अपने पति को ही follow किया है और हमारे पीछे कौन व कितने है ,इस पर कभी ध्यान नहीं दिया ।  लोगों के accounts खंगाले का काम मोदी जी कर रहे है हम नहीं ।  हमें क्या पड़ी है कि हम किसी का account खंगाले।”  हम ज़रा गुस्साए।
               ” हा-हा-हा , आप तो बड़ी ही मज़ाकिया है। पर यह बताइए आपने  अभी तक अपनी डी.  पी क्यों नहीं बदली ? कोई  फोटो भी नहीं डाली । मेरी मानिए भाई साहब की फोटो डाल दिजीए , ढेरों likes मिलेगें।”
                             मन हुया कैंची जैसी चलती इनकी ज़बान को कैंची से ही कतर दूं ,पर दूरी मज़बूरी थी।
                  झल्लाते हुए हमने उन्हें बताया कि यह सब करना हमने अभी सीखा नहीं है। दो पल के लिए उनकी बोलती में  ब्रेक लगा फिर अविश्वास से बोलीं—” क्या सच में अभी तक आप बिल्कुल socially inactive थी?”
                  अपनी गाड़ी को गल्त दिशा में दौड़ातै हुए हम बोले–   ” हमारी मेहमान नवाज़ी और दोस्तबाज़ी के बारे में तो  आप अच्छे से जानती ही है । इसके इलावा हम कई कल्बों और संस्थायों के कर्ता-धर्ता है। दान-पुण्य-सेवा के काम में भी सहयोग करते ही रहते है। रोज़ एक घन्टा बच्चों को फ्री टूयशन देते है। अब इससे  ज्यादा socially active क्या होंगें।”
                परिचिता ठहाका लगा कर बोलीं—” Omg! How old fashioned you are. You do not even  know the meaning of social activity.   ख़ैर आप दुख़ी न हो, आड़े वक्त में दोस्त ही काम आते है।  मैं आपको सब समझा दूगीं।   बहुत दिन से आपके हाथ का बना लज़ीज़ काश्मीरी खाना नहीं  खाया,  कल लंच पर मिलते है।”
          मन में आया कह दे कि  नेट पर सब मौजूद है काहे नहीं देख कर बना लेती।    परन्तू तहज़ीब ने जीभ थाम ली।  वह हमारी Self appointeded  गुरू थी और उन्हे गुरूदक्षिणा  देना हमारा  परम कर्तव्य था।

                            

Lost Friends

Valentine’s day is over but  I suppose its hangover is still  on me. Relaxing  in my rocking  chair I drifted into a reminiscent mood and   several faces started dancing before my  eyes. These were the faces of people with whom I have lost touch over the past decades. They are lost in the labyrinth of life and  had become characters of a forgotten story . But  today when I started thinking about them every face became alive and  every memory associated with them was crystal clear. Each one of them had touched my life in their own unique  way.  They had shared my smiles, my tears and a certain period of my growing years and though I do not know where they are today  but I  wish them all the happiness  and every  success in their lives.  This post is a note of  gratitude to them

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Happy Valentine’s Day

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चारों तरफ़ वेलनटाइन डे की धूम है, हर जगह प्रेमीयों का हजूम है  और बाज़ार में गिफ्टस की बिक्री में बूम है। छोटी- मोटी गिफ्ट तो छोड़िए एक अदद मुसा गुलाब तक दो सौ से कम नहीं मिल रहा है। भला हो अंग्रेज़ों का, उनके कवि चौसर का और  सबसे ज्यादा इस सोशल मिडिया का जिसकी वजह से हम हिन्दोस्तानियों  को वेलनटाइन डे, रोज़ डे, टेडी बियर डे इत्यादि के बारे में पता चला।  हमारे यहां  हज़ारों अवतार है , ढेरों त्योहार है पर एक भी दिन प्यार के इज़हार के लिए मुकर्रर नही । पुराने ज़माने में लड़की को पहली बार गुलाब जयमाला में गुंथे हुए मिलते थे और दूसरी बार तब  जब  वो सफेद चादर ओड़ कर जमीन पर लेटती थी । टैडी- बियर तो हाथ में तब आता था जब गोद में कोई मुन्ना या मुन्नी खेलता था । खैर—-
                        छोड़ें कल की बातें कल की बात पुरानी
                      नए दौर में लिखेगें हम मिल कर नई कहानी।
कहावत है– जब जागो तभी सवेरा ।  आज मौका भी है और दस्तूर भी तो क्यों ना अपन लोग भी बहती गंगा में हाथ धो लें ,वैसै आप चाहें तो नहा मी सकते है। सब आपकी इच्छा शक्ति पर निर्भर है और रहा  सवाल हमारा , तो भई  दिमाग कहता है—
      
प्यार खुशगवार खुशबू  है
हर लम्हा बिखरने दे फिज़ायों में
वक्त की बंदिशों में इसे कैद न कर                                                                 
                                              और दिल की ज़ुबान में—‘

सिर्फ एहसास है यह रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो।।

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मौन

      

कदाचित मन चाहे कुछ भी न बोलें
आँखों की खिड़की मरज़ी से खोलें 

ज़हन पर ना हो किसी रिश्ते का बोझ
अपनी रज़ा हो बस अपनी ही सोच ।
      
किसी को रिझाएं ना किसी को मनाएं
अपनी ही धुन पर अपनी लय सजाएं

छोड़ दे कुछ पल हर  साया साथ
हाथों में बस हो सिर्फ अपना ही हाथ ।

सुध बुध बिसराएं ना होश रहे खुद की
चलती फिरती काया लगे एक बुत सी

आज की चिन्ता ना खबर रखें कल की
खाली करें खुद को बेहद हो जाए हल्की

घड़ियों की बंदिश से हम होकर आज़ाद
मुलाकात करें खुद से कई बरसों के बाद

आँखें बंद कर लें पर दिखे सारी खुदाई
मौन की गूंज में दे मीठी अनहद सुनाई

शून्यता हो तन में शून्यता नख नख में
शून्यता हो मन में शून्यता रग रग में

शून्यता से उभरे एक शाश्वत अस्तित्व
रिक्तता को पाकर हम  हो जाएं तृप्त।।

                    

                    

बंद दरवाज़ा

दरवाज़े के बंद किवाड़ आवाज़ दे बुलाते हैं

अपनी सांकल खोलने को पल पल उकसाते हैं

चाह कर भी न क्यों ना  कर पाए  देहरी को पार

क्यों दिवार मांनिद बने हैं ये बंद लगते किवाड़

इन किवाड़ों के पीछे धुंधली यादें खड़ी हैं

अब तलक जिनकी छाप मेरे मन पर जड़ी हैं

काश खुला हो कोई खिड़की या झरोखा

जहां से आ रहा हो हवा का हल्का झोंका

वो झोंका जो उड़ा दे सारी हिचकिचाहट 

रगों में जगा दे थोड़ी सुगबुगाहट

वो झोंका जो खोले दरवाज़े के बंद पाट 

मुकम्मल  करा दे बस एक मुलाकात