‘कोई दिवाना कहता है‘ एक युवा कवि-कृत, युवकों के लिए रचित, यौवन की भावनायों, संवेदनायों, मर्यादायो और विपदायों को दर्शाता काव्य- संग्रह है। प्रत्येक पृष्ठ एक युवा दिल की धड़कन सा प्रतीत होता है। एक ऐसी धड़कन जो प्रियतम की झलक भर से कभी तो बेकाबू हो जाती है और कभी बिछोह की कल्पना मात्र से बेजान। हालांकि दो चार रचनाएं पिता, माँ, प्रकृति, शहीदों के प्रति पुष्प अर्पित करती है परन्तु डाक्टर कुमार विश्वास का यह गुलदस्ता एक प्रेयसी को उसके प्रेमी की लयबद्ध भेंट है। आरम्भ से अन्त तक प्रेम की जो धारा उमड़ी है, उसे मिलन की मदुयामिनी के रूप में कहीं तो कुछ पलों के लिए किनारा मिल गया है किन्तु मुख्य रूप से वो राह की बाधायों से टकराती, मंज़िल तक पहुंचने के इन्तज़ार में छटपटाती, बन्दिशों और मर्यादायों के भंवर में डूबती और विरह की ज्वाला से भीतर ही भीतर सूखती नज़र आई है।
डाक्टर कुमार विश्वास अपने काव्य-संग्रह ‘ कोई दिवाना कहता है ‘ के आरम्भ में कहते है—
पूरा जीवन बीत गया है,
बस तुमको गा भर लेने में—
हर पल कुछ कुछ रीत गया है,
पल जीने में, पल मरने में,
इसमें कितना औरों का है,
अब इस गुत्थी को क्या खोलें,
गीत, भूमिका सब कुछ तुम हो,
अब इससे आगे क्या बोलें—–
पहली कविता ‘बांसुरी चली आओ‘ तड़पते दिल की पुकार है—
तुम अगर नहीं आयी गीत गा न पाऊँगा
साँस साथ छोड़ेगी सुर सजा न पाऊँगा
तान भावना की है शब्द शब्द दर्पण है
बांसुरी चली आओ होंठो का निमन्त्रण है।
मिलन के पलों का असर भी देखिए—
जब भी मुँह ढक लेता हूँ
तेरी ज़ुल्फों की छाँव में
कितने गीत उतर आते है
मेरे मन के गाँव में।
प्रेम में ईर्षा की कसक न होने से प्रेम अधूरा लगता है, इसी लिए शायद कवि को होली के अवसर पर गुलाल के भाग्य पर मलाल हो आया है।
आज होलिका के अवसर पर जागे भाग गुलालाल के
जिसने मृदु-चुम्बन ले डाले हर गोरी के गाल के
प्रियतमा की मधुर यादों की भी अजब तासीर है—
तुम आईं चुप खोल सांकलें
मन के मुंदे किवार से
राई से दिन बीत रहे है.
जो थे कभी पहार से।
बिछुड़ने पर दर्द का एहसास और निराशा का आलम भी कम ऩहीं–
तुम बिना मैं स्वर्ग का भी सार लेकर क्या करूँ
शर्त का अनुशासनोंका प्यार लेकर क्या करूँ।
प्रेम की दुनिया अपने आप में सम्पूर्ण है। हर रस से रची हुई, हर रंग से रंगी हुई अत: इस काव्य-संग्रह के विषय में संक्षेप में पाठक यही कहेगा—
इस दुनिया के रंगी नज़ारे दो आँखों मे कैसे आए
कवि से पूछो इतने अनुभव एक कंठ से कैसे गाए।
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