सूखी है नदिया
खाली गगरिया
पनघट हुए विरान
नदी किनारे
गांव है सूना
बँजर भए खलिहान
जाने कब थी
बिजली चमकी
कब बादल थे गरजे
कब सौंधी सी
महक उठी थी
कब जलधर थे बरसे
आग उगलते
सूरज ने
लाखों का जीवन फूंका
आँखों में
लहराया सावन
पर धरती पर सूखा ।।








